LetsDiscuss: मीडिया को 500 रुपये के निहितार्थ


मीडिया के लोगों को मन में लगातार उठ रहे इस सवाल से, भले ही यह नितांत निजी किस्म का ही हो, सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है कि आखिर सतना के रिपोर्टर अपने आप को इतने सस्ते में बेचने के लिए तैयार क्यों हो गये? यह घटना भारतीय राजनीति से ज्यादा भारतीय मीडिया की हकीकत को उजागर करता है. और यह कम से कम मेरे लिए लंबे समय से दुख का एक बड़ा कारण रहा है. एम जे अकबर की बाईलाइन
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