LetsDiscuss: खोखली भाषा,खोखले लोकतंत्र


हमने लोकतंत्र को क्या बना दिया है? एक बार लोकतंत्र के संपूर्ण दोहन के बाद आखिर क्या होता है? क्या होता है जब प्रत्येक लोकतांत्रिक संस्था किसी खतरनाक चीज़ में तब्दील हो जाती है? आज जब लोकतंत्र और मुक्त बाजार एक साथ मिल कर एकल जैव तत्व बन चुके हैं और एक ही विचार है जो लगातार मुनाफा बढ़ाने के उद्देश्य के इर्द-गिर्द घूमता रहता है, ऐसे में क्या होगा? सुप्रसिद्ध लेखिका अरुंधति राय के विचार
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