LetsDiscuss: एक सपने की मौत


आईआईटी और आईआईएम जैसे अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त शिक्षा संस्थानों में प्रतिभावान दलितों की आत्महत्या की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. लेकिन इन बच्चों की आत्महत्याओं के बाद न व्यवस्था का शिकंजा ढीला होता है, न आरक्षित सीट के तहत प्रवेश परीक्षा के नियम बदलते हैं. न सहपाठियों का उपेक्षा का नज़रिया बदलता है, न इन बच्चों के माता-पिता समय रहते चेतते हैं. सुधा अरोड़ा का विश्लेषण
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