LetsDiscuss: न आकस्मिक न विकल्पहीन


जलियावाला बाग की जनसभा में डायर देशव्यापी गदर की संभावना देख रहा था. यह उसका अपना आकलन था. इसके विपरीत दिल्ली पुलिस को अपना आकलन करने की स्वतंत्रता नहीं है. वह कोई भी बड़ा कदम केंद्र सरकार के आदेश से ही उठाती है. रामलीला मैदान में सत्याग्रह के लिये जुटी जनता से देश को खतरा नहीं सहानुभूति थी. लेकिन केंद्र सरकार अपने ऊपर खतरा महसूस कर रही थी. वरिष्ठ पत्रकार राजकिशोर का विश्लेषण
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