हबीब तनवीर अब जब नहीं हैं तो उनके बारे में कई बातें याद आ रही हैं. रायपुर वाले घर में खाने की मेज के पास बैठ कर सिगार फूंकते हुए या रिहर्सल के दौरान किसी के खराब अभिनय पर अफसोस करते हुए या बातचीत करते समय सवालों को तौलने वाले अंदाज में चश्मे के पीछे से देखते हुए....दिल्ली 6 देखते हुए जब 'सास गारी देवे' के शब्द कान में पड़े तो मुंह से निकल गया- हबीब तनवीर. लगा कि इस बार हबीब साहब अपने घर आएंगे तो उनसे लंबी बातचीत की जाए. उनके जल्दी ही रायपुर आने की खबर मिली. लेकिन वे रायपुर नहीं आ पाए. खबर आई कि अस्पताल में भर्ती हैं. फिर एक दिन सुबह-सुबह उनके देहावसान की खबर... फिल्म ब्लैक एंड व्हाईट के वे दृश्य आंखों के सामने आ गये, जिसमें हबीब साहब सफेद कफन में लेटे हुए थे. तो क्या यह जिंदगी के नाटक का रिहर्सल था ?... रंगमंच पर शाइर नासिर काज़मी की ग़ज़ल गाते हुए हबीब तनवीर याद आ रहे हैं- "गए दिनों का सुराग लेकर किधर से आया, किधर गया वो, अजीब मानूस अजनबी था, मुझे तो हैरान कर गया वो..."
यहां पेश है, हबीब तनवीर से की गई एक पुरानी बातचीत के अंश
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