IndiaShining: विचारहीन प्राथमिकता ओं से आजादी


प्रश्न उठता है कि आजादी के 62 साल बाद देश की आम जनता स्वतंत्रता के प्रतीक तिरंगे को फहराने के प्रति क्या उतनी ही उत्साहित है जितनी 50 वर्ष पूर्व थी. स्वतंत्रता दिवस पर बच्चों के अलावा क्या देश के मेहनतकश व बहुसंख्य समाज भी प्रभातफेरी निकालते हुए आजाद महसूस करते हुए स्वयं को राष्ट्र की संप्रभुता और प्रगति के लाभार्थी के रूप में देख रहे हैं? - मेधा पाटकर का विश्लेषण
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